मानव जीवन में अंधकार से प्रकाश पथ
दिन के अभाव में रात रात के अंत में प्रभात सूरज चांद दीपक का परिवर्तन मय साथ यह सिलसिला जारी है इस परिवर्तन के लिए हम प्रकृति के आभारी हैं प्रकृति की बलिहारी है
यदि 24 घंटे सूरज का ही साम्राज्य होता तो क्या होता उल्लू बड़ा नाराज होता चोर परेशान होता सूरज की भाषा में ही चंद्रमा उत्तर देता दिन में सूरज तपता रात चांद आग उगलता तो हमारा क्या होता हरा भरा कुछ ना होता
इसलिए परिवर्तन हितकारी मंगलकारी है इसलिए रात्रि रजनी हम तेरे भी आभारी हैं रात्रि में अंधेरे का उपचार दीपक है मोह निशा का उपचार ज्ञान का सूरज है अज्ञान हमारा शत्रु और ज्ञान हमारा मित्र है चिंतन मंथन शास्त्र स्वाध्याय दिव्य ज्ञान से मानव मानवता का महके दिव्य चरित्र है संसार में पापों का बुराई का मूल अज्ञान है इसलिए रात के प्रतिकार के लिए दीपक और मोह तिमर अज्ञान के उपाय के लिए ज्ञान की आराधना करनी चाहिए
शरीर के जख्मों से ज्यादा मन के जख्मों को ढोना ज्यादा खतरनाक होता है जख्म मन के हो या शरीर के इन्हें पालना पोशना नहीं चाहिए सबसे बड़ी भूल यह करते हैं कि जख्मों को कुरेदने वालों को अपना मित्र समझते हैं और प्रायः ऐसे लोग मिल ही जाते हैं जो मन के जख्मों को हवा देते रहते हैं और उन जख्मों को तरोताजा रखकर जिंदगी भर दुखी रहते हैं यह सबसे बड़ी भूल है ऐसे सैकड़ों दुखी जीव देखें है जो बरसों पुराने दुख को ढोकर दुखी है महापुरुष जिनकी हम पूजा करते हैं वह भी हमें यही सीख देते हैं भगवान राम जिनका राजतिलक होने वाला था उनके लिए मां केकई वनवास में कारण बनती है लेकिन राम एक पल को भी केकई के लिए वन जाने का कारण नहीं मानते वह चिंतन करते हैं यह मेरे अपने ही किसी पूर्व कर्म का उदय है जो मुझे आज वन जाना पड़ रहा है जीवन का मूल आधार ही क्षमा है जीवन में फूल और कांटे तो मिलते ही हैं कांटो की उपेक्षा कर फूलों की खुशबू लेकर आगे बढ़ने वाला ही सफल होता है किसी भी कार्य में सफलता असफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मन को तनाव रहित कैसे रख सकते हैं क्योंकि तनाव हमारी बुद्धि का हरण कर लेता है हित अहित का विचार नहीं कर पाते भौतिक जगत हो या आध्यात्मिक जगत तनाव रहित मन ही सफलता का कारण है इसलिए दूसरों के द्वारा की गई भूलो की उपेक्षा करके ही आगे बढ़ सकते हैं अनुकूल प्रतिकूल जो भी मिला है यह सब रास्ते के पड़ाव हैं मंजिल नहीं रास्ते के पड़ावो से मोह करने वाला कभी भी अपनी मंजिल नहीं पा सकता क्या फर्क पड़ता है रास्ते में जिस पड़ाव में रात गुजारी है वो पडाव अनुकूल था या प्रतिकूल उसे छोड़ ही देना है ट्रेन की बोगी कितनी ही सुविधाजनक हो अथवा असुविधाजनक मंजिल आने पर उसे हम छोड़ ही देते हैं इसी प्रकार से अतीत की कड़वी यादों को भूलने में ही भलाई है यही वह कला है जो सुख शांति की मलाई देती है
इस संदर्भ में वृक्ष बड़ी शिक्षा देते हैं वृक्षों को कितना भी काट दिया जाए छांट दिया जाए वह कटने छटने की यादों में ना उलझ कर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं और उनका यही विश्वास कुछ ही दिनों में फिर से हरा भरा हो जाता है इसके विपरीत प्रायः एक बात जरूर बोलते हैं सब भूल सकता हूं पर उसकी वह एक कडवी बात नहीं भूल सकता यदि कड़वी बात को नहीं भूल सकते तो आपको सफलता के सुख शांति फूल भी नहीं मिल सकते और स्वीकार कर रहे हैं कि एक कड़वी बात है बाकी सब अच्छी हैं किसी की हजारों अच्छाइयों को भूलकर उसकी एक कड़वी बात को याद रखने मैं कौनसी बुद्धिमानी है कड़वी बात को भूलने की कला ही सुख शांति समृद्धि सफलता की कहानी है
Comments
Post a Comment